
इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित लहरी अंकल की कार्टूनशाला का हुआ समापन
इंदौर। बचपन में हम जो कला-कौशल सीखते हैं, वह जीवन में बहुत काम आता है। कला-कौशल हमारे मस्तिष्क का विकास करने में सहायक होता है। कार्टून बड़ी से बड़ी बात को आसानी से कहने की विधा है। जिसमें व्यंग्यात्मक लहजे में इस तरह कहने की क्षमता होती है और किसी को बुरा भी नहीं लगता। यह बात कलेक्टर शिविम वर्मा ने कही।

श्री वर्मा इंदौर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित ख्यात कार्टूनिस्ट इस्माइल लहरी की तीन दिवसीय कार्टूनशाला के समापन अवसर पर रविवार को प्रतिभागी बच्चों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने जीवन में पढ़ाई के साथ खेलकूद और रचात्मक गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कार्टून के माध्यम से हम अपनी अभिव्यक्ति को व्यक्त कर सकते हैं। बच्चों को खेल के साथ ही बाहर घूमने-फिरने और ऐसी प्रेरक गतिविधियों में भाग लेना चाहिए, जो आगे भी आपके जीवन में काम आती है। श्री वर्मा ने इंदौर प्रेस क्लब के इस आयोजन को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि यहां बच्चों के बीच आकर बहुत अच्छा अनुभव हो रहा है।
इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम ने स्वागत उद्बोधन देते हुए तीन दिन की इस कार्टूनशाला के महत्व पर प्रकाश डाला और आशा प्रकट की कि यहां से कला-कौशल सीखकर प्रतिभागी बच्चे विभिन्न क्षेत्रों में ऊंचा मुकाम हासिल करेंगे। कार्टूनिस्ट श्री लहरी ने बच्चों से कहा कि हमारा यह रिश्ता-नाता सिर्फ तीन दिन तक सीमित न रहे, आप लोगों ने इस कार्टूनशाला में जितना सीखा है, उसका निरंतर अभ्यास घर पर करें तो आपकी कला में और निखार आता जाएगा। आपको जब किसी मार्गदर्शन की जरूरत पड़े तो मैं उपलब्ध रहूंगा। इस मौके पर श्री लहरी ने स्वयं के द्वारा बनाया हुआ कैरीकेचर कलेक्टर श्री वर्मा को भेंट किया। मस्तीभरी तीन दिवसीय कार्टूनशाला का अंतिम दिन बहुत ही उल्लासित था। बच्चों के बीच कलेक्टर श्री वर्मा भी प्रसन्नता से भरे नजर आए और बच्चों द्वारा बनाए गए चित्रों पर ऑटोग्राफ देकर उत्साहवर्धन भी किया।

अतिथियों का स्वागत प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम, उपाध्यक्ष संजय त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष मुकेश तिवारी, कार्यकारिणी सदस्य प्रमोद दीक्षित, अभय तिवारी, पूनम शर्मा, नितिन जैन, लक्ष्मीकांत पंडित ने किया। संचालन महासचिव प्रदीप जोशी ने किया और आभार मुकेश तिवारी ने माना। इस अवसर बच्चों के अभिभावक और मीडिया के साथी उपस्थित थे। कार्टूनशाला में पहले दिन महापौर पुष्यमित्र भार्गव और दूसरे दिन तुलसी शोध संस्थान चित्रकूट की निदेशक डॉ. मंजूषा जौहरी व स्वाति काशिद ने अतिथि के रूप में पधारकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया।


