अमलतास अस्पताल में 7 वर्षीय मासूम के जन्मजात मोतियाबिंद का सफल ऑपरेशन, फेको लेजर पद्धति से मिला नया जीवन

देवास। अमलतास सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के नेत्र रोग विभाग ने एक बार फिर चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हुए एक 7 वर्षीय बालक को नई रोशनी दी है। जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित मासूम का अत्याधुनिक फेको लेजर पद्धति द्वारा सफल ऑपरेशन कर और लेंस प्रत्यारोपण कर डॉक्टरों की टीम ने उसकी दृष्टि पूरी तरह लौटा दी है।परिजनों के अनुसार, बालक जन्म से ही देखने में असमर्थ था। आर्थिक तंगी और सही मार्गदर्शन न मिलने के कारण वे लंबे समय से इलाज कराने में असमर्थ थे।

परिजनों ने देश के कई बड़े महानगरों और अस्पतालों में भी डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन उन्हें कहीं से भी संतोषजनक जवाब या समाधान नहीं मिला। अंततः जब वे बच्चे को लेकर अमलतास अस्पताल पहुंचे, तो विशेषज्ञों की टीम ने गहन जांच-पड़ताल कर तुरंत ऑपरेशन का निर्णय लिया।यह जटिल और संवेदनशील सर्जरी भारत के प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ और सर्जन डॉ. पराग शर्मा एवं उनकी विशेषज्ञ टीम द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न की गई। इस टीम में डॉ. शिशिर उर्ध्वरेषे , डॉ. दीपशिखा सोलंकी, डॉ. प्रियंका, डॉ. अरुण पाटीदार डॉ. ममलेश्वरी पाटिल तथा नेत्र सहायक अजय सक्सेना, निमिषा श्रीवास्तव और कमलेश मालवीय शामिल रहे। आधुनिक तकनीकों और अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से किए गए इस ऑपरेशन के बाद अब बालक पूरी तरह स्वस्थ है और स्पष्ट रूप से देख पा रहा है।अमलतास समूह के चेयरमैन श्री मयंकराज सिंह भदौरिया एवं संस्थापक चेयरमैन श्री सुरेश सिंह भदौरिया ने इस जटिल सर्जरी को सफलता से अंजाम देने पर डॉक्टरों की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अमलतास अस्पताल का निरंतर यही ध्येय है कि समाज के हर वर्ग तक विश्वस्तरीय, अत्याधुनिक और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं बिना किसी बाधा के पहुंचाई जा सकें।

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