हर कोई गमज़दा है काजी साहब की रुखसती पर।। शहर काजी इरफान अहमद अशरफी साहब हमारे बीच नहीं रहे

(फरीद खान)

हमेशा मिलना… हालचाल जानता और…घर परिवार की खैरियत पूछना, इस तरह का मिजाज़ था उनका,। देवास में आज 13 मई को दोपहर में एक दुखद खबर से हर कोई अफसोसजनक हो गया, काजी ए शहर देवास जनाब इरफान अहमद अशरफी साहब का इंतकाल ( निधन) हो गया…काजी साहब एक खुशमिजाज शख्सियत थे…काजी साहब से जब कभी भी किसी की भी मुलाकात होती तो वह उनका मुरीद हो जाता… क्योंकि काजी साहब सभी से एक जैसे मिलते थे…काजी साहब मुस्लिम समाज के काजी तो थे ही साथ में उनके अन्य समाज, धर्म के लोगों में भी गहरे रिश्ते भी उनकी खास पहचान रही…ख्वाजा गरीब नवाज को फॉलो करने वाले मरहूम काजी साहब हमेशा देवास में एकता, भाईचारे और इंसानियत को सबसे पहले आगे रखते थे। आप ने अपनी खानदानी काजियत की विरासत को आगे बढ़ाया साथ ही, कारी, हकीम (वैद्य), सूफी, और कई इल्म के पैरोकार थे । विरासत की बात निकली है तो बताते चलें कि देवास की रियासत के क़ाज़ीयत को भी आपने रिश्तों के साथ बखूबी निभाया…इस वजह से मरहूम काजी साहब के देवास रियासत में भी मजबूत रिश्ते जगजाहिर रहे… मोहर्रम में जब सरकारी ताजिया काजी साहब के निवास मतलब देवास के राजवाड़े से निकलता है उस दौरान मरहूम काजी इरफान अहमद साहब और दिवंगत महाराज श्रीमंत तुकोजीराव पवार साहब का मिलन भी देखने लायक रहता था, महाराज के निधन के बाद इस परंपरा को श्रीमंत विक्रमसिंह पवार की उसी शिद्दत से निभाते रहे…साथ मरहूम काजी साहब ने उसी लहज़े से महाराज को आदर देते… मतलब काजी साहब ने पैलेस से अपने मजबूत रिश्ते हमेशा निभाए रखे। एक बात और बताता हूं काजी होने की वजह से कई लोग निकाह के लिए भी आते तो कई तलाक के लिए भी…लेकिन काजी साहब तलाक के मसले पर इतनी बारीकी से समझाते थे कि कई रिश्ते टूटने से बच जाते…कोई भी खास या आम काजी साहब के हुजरे (ऑफिस)) में आता तो एक अपना सा लगता…आज मरहूम काजी इरफान अहमद अशरफी साहब हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन उनके विचार और इसको साथ लेकर चलने का नतीजा है कि शहर का हर धर्म मज़हब का इंसान गमज़दा है। खिरादे अकीदत पेश करते हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top